न जाने किस रूप में प्रभु मिल जाये !
एक सब्ज़ी वाला साइकिल पर अपनी सब्ज़ी की दुकान लगा कर घूम घूम कर सब्जी बेचता था। "भगवान" उसका तकिया कलाम था । जब भी कोई उससे पूछता आलू कैसे दिये भाई, तो वह कहता 10 रुपये किलो भगवान! कोई पूछता हरी धनिया है क्या? तो वह उत्तर देता 'बिलकुल ताजा है भगवान'....वह सबको भगवान कहता था। धीरे धीरे लोग भी उसको भगवान कहकर पुकारने लगे।
एक दिन एक ग्राहक ने उससे पूछा तुम्हारा कोई असली नाम है भी या नहीं? तो उसने अपनी आदत के अनुसार कहा, “है न ,भगवान ! भैयालाल पटेल। ग्राहक ने सब्जी लेते हुए पूछा, “तुम हर किसी को भगवान क्यों बोलते हो!?”
उसने कहा, “भगवान, मैं अनपढ़ गँवार आदमी हूँ। गॉव में मज़दूरी करता था, गाँव में एक नामी सन्त की कथा हुईं...कथा मैंने सुनी पर मेरे पल्ले नहीं पड़ी लेकिन उसकी एक लाइन मेरे दिमाग़ में आकर बैठ गई।उन्होंने कहा हर इन्सान में भगवान है। तलाशने की कोशिश तो करो, पता नहीं किस इन्सान में मिल जायें और तुम्हारा उद्धार कर जायें...बस उस दिन से मैने हर मिलने वाले को भगवान की नजर से देखना ओर पुकारना शुरू कर दिया..और वाकई चमत्कार हो गया.. दुनिया के लिए शैतान आदमी भी मेरे लिये भगवान हो गया। ऐसे दिन फिरे कि मैं अच्छा कमाने लगा। सुख समृद्धि के सारे साधन जुड़ते गये.. मेरे लिये तो सारी दुनिया ही भगवान बन गई।“
वास्तव में जीवन एक प्रतिध्वनि है.. आप जिस लहजे में आवाज देंगे वो पलटकर आपको उसी लहजे में सुनाईं देंगी।
कर्म करो तुम आराम से रहो राम के साथ
वैतरणी तर जाओगे पा भगवन का हाथ।
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