माँः एक तू ही भरोसा, एक तू ही सहारा..
माँ तो माँ है, माँ के जैसा,
इस दुनिया में कोई नहीं।
हमारे जीवन की खातिर ,
कितनी रातों वो सोई नहीं।
अपनी जान की बाजी लगा,
वह हमें दुनिया में लाई है।
तभी जहाँ में सबसे ऊपर,
उसने अपनी जगह बनाई है।
इस वृक्ष के जैसी तो ,
दुनिया में कोई छांव नहीं।
खुद तपती धरती पर चलती ,
हमको रखने देती पांव नही।
माँ तो अपनी जान भी दे कर,
बच्चे की जान बचाती हैं।
इसकी ही अनमोल दुआयें,
हर मुश्किल से पार लगाती हैं।
माँ जीवन का अर्पण है,
बच्चों के लिए समर्पण है।
बच्चे क्या सही गलत करते
उनके जीवन का दर्पण है।।
बच्चा हँसे तो वो हँसती,
बच्चा रोये तो वो रोती है,
करूणामयी,प्रेम की मूरत,
माँ ऐसी ही होती है।
माता के हृदय को समझें,
कभी छोड़े उसका हाथ नहीं।
उसको अगर कभी दुखी किया तो,
ईश्वर भी देंगे साथ नहीं।
माँ एक एहसास है सच्चा सपना है,
उसके आशीष से ही संसार का हर सुख अपना है।
जीवन का रोम - रोम ऋणी है उस माँ का,
जिसका जीवन ईश्वर की अप्रतिम रचना है।
ना कोई श्रृंगार ना ही कोई सजावट
ना कोई घमंड और ना ही कोई दिखावट,
माँ जैसी भी रहे इसकी सादगी में
होती नहीं कोई मिलावट।।
जब भी खुद को अकेला समझा माँ!
तुमको ही सामने पाया,
दुनियाँ की इस भीड़ में जब लगा छूटने हाथ मेरा
उस मोड़ पर हाथ तुम्हारा ही पाया ....
माँ तुम अनुभूति हो,
तुम अहसास हो ,
जीवन जीने की आस हो ,
बड़ा ही सम्पन्न है वह, तुम जिसके पास हो !
तुम आदि हो अनंत हो,
धुप-छांव-बसंत हो..
तुम निर्मल कोमल काया रूपी
देवी का अवतार हो..
माँ तुम शब्द नहीं संसार हो...!!
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