बूझो तो जाने

 हरी थी मन भरी थी लाख मोती जड़ी थी

राजा जी के बाग में दुशाला ओढ़े खड़ी थी


मोती की पोती जूड़ा न चोटी


इधर गड्डा उधर गड्डा 

गाय मरखनी दुग्धा मीठा


आटे जैसी गुदगुदी बताशे जैसी मीठी

जल्दी बताओ इनाम में मिलेगी अँगूठी


कटोरे में कटोरा बेटा बाप से भी गोरा



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