सूर्योपासना का महत्त्व
हमारी भारती य संस्कृति में सूर्य देव को विशेष स्थान प्राप्त है। उन्हें प्रत्यक्ष देवता कहा गया है , क्योंकि वे हमें प्रतिदिन दिखाई देते हैं और समस्त जीवन के आधार हैं। सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना करना भी असंभव है। वे हमें प्रकाश , ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। सूर्योपनिषद के अनुसार, समस्त देव, गंधर्व और ऋषि सूर्य रश्मियों में निवास करते हैं। स्कंदपुराण में कहा गया है कि सूर्य को अर्ध्य दिए बिना भोजन करना पाप के समान है। ब्रह्मपुराण के अध्याय 29-30 में सूर्य को सर्वश्रेष्ठ देवता मानते हुए सभी देवों को इनका प्रकाश स्वरूप बताया गया है। भारतीय संस्कृति और परंपरा में प्रकृति की उपासना का विशेष स्थान रहा है और इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण परंपरा है सूर्योपासना जिसमें सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है , जिसे अर्घ्य देना कहा जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और आज भी लोग श्रद्धा एवं विश्वास के साथ इसका पालन करते हैं। अर्घ्य देना केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है , बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा हुआ है। कुल मिलाकर हम यह स्वीक...