ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल का महत्व
भारतीय सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस मास में पड़ने वाले मंगलवार को “ बड़ा मंगल ” या “ बुढ़वा मंगल ” कहा जाता है। उत्तर भारत , विशेषकर उत्तर प्रदेश में बड़े मंगल का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना , सेवा , दान और भक्ति के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी की उपासना करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख , शांति तथा बल की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल का संबंध केवल पूजा और व्रत तक सीमित नहीं है , बल्कि इसके पीछे अनेक पौराणिक कथाएँ और लोकमान्यताएँ भी जुड़ी हुई हैं। ये कथाएँ भगवान हनुमान की भक्ति , शक्ति , सेवा और भगवान श्रीराम के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती हैं। उत्तर भारत में विशेष रूप से इन कथाओं का अत्यंत महत्व माना जाता है। बड़े मंगल से संबंधित कुछ पौराणिक कथाएं 1. भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रथम मिलन की कथा सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही भगवान श्रीराम और हनुमान जी का प्रथम मिल...