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तुम उड़ो! तुम आनंद मनाओ!

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  तुम मस्ती करो! खुद को लाइवली रखो! थोड़ी बहुत चीटिंग भी करो! सिर्फ परिवार, पति और बच्चों का मत सोचो अपने बारे में सोचना सीखो!   घर की देखभाल करती हो न? अब खुद की भी करो! तुम्हारे भीतर एक नटखट, खुशमिजाज लड़की छुपी हुई है जी, उसकी तारीफ करो।   अधिक नहीं, लेकिन दिन का एक घंटा खुद के लिए रखो और उस एक घंटे में, जो तुम्हें अच्छा लगता है, वो करो। तुम्हारे भीतर जो लड़की है न, उसे कभी-कभी गलती करना भी अच्छा लगता है, तो करो।   कोई फर्क नहीं पड़ता, हर कोई अपने हिसाब से खुशियाँ ढूँढ़ रहा है, फिर तुम क्यों पीछे रहो! सखियाँ बनाओ, खुद को व्यक्त करो।   कभी-कभी उस डायट चार्ट को बाजू में रख दो, मस्त बटर मस्तानी खाओ, हो जाने दो जरा इधर-उधर, कोई फर्क नहीं पड़ता। लोग क्या सोचेंगे..माय फुट बच्चों को कम मार्क्स आएँ कभी, तो जाने दो ना।   उम्र हो गई है...अब क्या रखा है इसमें... ऐसे शब्द कभी मत बोलो, क्योंकि उम्र तो एक संख्या ही है जी, खूब किया सबके लिए, अब निकालो समय खुद के लिए, तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देख, यकीन है मुझे, सारा घर हँसेगा जी।   एक बात याद रखना .. तुम खुश नहीं रहो...

वसन्त का मानवीकरण....महावर !!

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अंगशुची , मंजन , वसन , मांग , महावर , केश। तिलक भाल , तिल चिबुक में , भूषण मेंहदी वेश।। मिस्सी काजल अरगजा , वीरी और सुगंध। अर्थात अंगों में उबटन लगाना , स्नान करना , स्वच्छ वस्त्र धारण करना , मांग भरना , महावर लगाना , बाल संवारना , तिलक लगाना , ठोढी़ पर तिल बनाना , आभूषण धारण करना , मेंहदी रचाना , दांतों में मिस्सी , आंखों में काजल लगाना , सुगांधित द्रव्यों का प्रयोग , पान खाना , माला पहनना , नीला कमल धारण करना सौभाग्य स्त्रियों के लिए शास्त्रों में बताया गया है। हिन्दू धर्म में छोटे - बड़े सभी प्रकार के शुभ कार्य महावर के बिना शुरू नहीं होते है। भारत में विवाह , त्योहार , पूजा आदि शुभकार्यों में पैरों में महावर लगाने का प्रचलन है। महावर को ‘ आलता ’ व ‘ जावक ’ भी कहा जाता है। यह लाल रंग का तरल पदार्थ होता है   जिसे महिलायें पायल और बिछिया पहनने के साथ ही अपने पैरों में लगाती हैं। महावर या आलता लगाने से महिलाओं के पैर और भी अधिक खूबसूरत लगने लगते है। ब...

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