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ध्यान का महत्व ....हमारे जीवन में

योग का आठवां अंग ‘ध्यान’ अति महत्वपूर्ण हैं। ध्यान को धर्म और योग की आत्मा माना जाता है। यह अग्नि की तरह है इसमें जलकर बुराइयाँ भस्म हो जाती हैं। ध्यान करना जरूरी है क्योंकि ध्‍यान से ही हम अपने मूल स्वरूप या कहें कि स्वयं को प्राप्त कर सकते हैं अर्थात हम कहीं खो गए हैं तो स्वयं को ढूंढने के लिए ध्यान ही एक मात्र विकल्प है दुनिया में हर किसी को ध्यान की जरूरत है चाहे वह किसी भी देश या धर्म का व्यक्ति हो। ध्यान से ही व्यक्ति की मानसिक संरचना में बदलाव कर हिंसा और मूढ़ता की स्थिति को रोकना संभव है। ध्यान के अभ्यास से मनुष्य में जागरूकता बढ़ती है और लोगों को समझने की शक्ति जाग्रत होती है इसलिए एक ध्यानी व्यक्ति चुप रहकर लोगों के भीतर झांककर जान लेता है कि उनके मन में क्या चल रहा है और यह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है। ध्यान का अर्थ है- ध्यान का मूल अर्थ है जागरूकता, अवेयरनेस, होश, साक्ष‍ी भाव और दृष्टा भाव। अंग्रेजी में इसे ‘मेडिटेशन’ कहते हैं और हिन्दी का ‘बोध’ शब्द इसके करीब है। योग सूत्र के अनुसार 'तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम।।' अर्थात्, जहाँ चित्त को लगाया जाए उसी में वृत्त...

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