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आज लोग बुढ़ापा एन्जॉय करने लगे

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  अब खुलकर हँसने और जीने लगे, खुद को पोते-पोतियों में नहीं उलझाते अपने जैसे दोस्तों संग ये वक्त बिताते।   कोई लाचारी, बेबसी, उदासी अब नहीं दिखती अब इनकी ज़िन्दगी इनकी शर्तों पर गुज़रती, कभी ये गाने गाते, कभी ठुमके लगाते, अपनी कहानी सुनाते, खुलकर मुस्कुराते।   इनकी किट्टियाँ होती, जन्मदिन मनाते, अपनी पेंशन खुद पर ही ये लुटाते, ना ताना मारते, ना बहुओं की सुनते, अपने अधूरे सपने इस उम्र में बुनते।   फेसबुक यूट्यूब के ये दीवाने होते, इनके भी किस्से फ़साने होते, इनको भी दोस्तों का इंतजार होता, पार्क में रोज़ यारों का जमघट होता।   अब के बुजुर्ग समझने लगे ज़िन्दगी के बचे लम्हें जीने लगे, समझ गए साथ कुछ नहीं जाने वाला, तो खुशनुमा लम्हें ये सहेजने लगे।

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