पढ़ि'ए' एवं अपनाइ'ए'......😊

उठिए-जल्दी कीजिए घर के काम, घर में होंगे पौबारे।
लगाइए- सवेरे मंजन, रात को अंजन।
नहाइए- पहले सिर, हाथ-पांव फिर।
पीजिए - दूध खड़े होकर, दवा-पानी बैठकर।
खिलाइए - गाय को रोटी चाहें पतली हो या मोटी।
पिलाइये - प्यासे को पानी नहीं कुछ हानि।
करिए- आये का मान ,जाते का सम्मान।
सीखिए - बड़ों की सीख, बुजुर्गों की रीत।
जाइए- दुःख में पहले ,सुख में बाद में ।
देखिए- माता की ममता ,पत्नी की समता।
परखिये- चाहे सब को ,छोड़ माँ को।
भगाइए- मन के डर को,बूढ़े वर को।
सोचिए- एकांत में, करो सबके सामने।
बोलिए - कम से कम,कर दिखाओ ज्यादा से ज्यादा।
चलिए -  तो अगाड़ी ,ध्यान रहे पिछाड़ी।
सुनिये- सबकी, करिए अपने मन की।
दीजिए - दान जानकर ,जो ले खुशी मानकर.
बोलिए- जबान संभालकर, थोड़ा पहचानकर।
सुनिए- पहले पराये की, पीछे अपने की।
लीजिए- जिम्मेदारी उतनी, संभले जितनी।
रखिए- चीज जगह पर, जो मिले समय पर। 
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