स्वाधीनता के रंग...पतंग के संग..!
मौसम आज पतंगों का है
नभ में राज पतंगों का है
इंद्रधनुष के रंगों का है
मौसम नई उमंगों का है।
आसमान में उड़ती पंतग
देख-देख उसे हर्षाये मन
कट जाती जब डोरी से
लूटने तब लग जायें सब
माँ से बोला कुन्नू-
माँ, मैं भी पतंग उड़ाऊँगा
लंबी डोर बांध पतंग को
सबसे ऊपर ले जाऊँगा।
उसमें भर सपनों के रंग
उडायेंगे पतंग आसमान में
ऐसी भरेगी उड़ान पतंग
जो भर देगी जीवन में खुशियों के रंग।
उसमें होंगे सारे रंग
नारे लिखूँगा एकता के
सबको लेकर साथ मैं अपने,
हम हैं साथ स्वाधीनता के।
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