एक रसोईये का प्रेम पत्र
अलग-अलग व्यवसाय करने वाले लोग प्रेम पत्र लिखें और उसमें उनके व्यवसाय के शब्दों की प्रधानता हो तो सोचिए क्या दृश्य होगा! चलिए देखते हैं रसोईये का प्रेम पत्र........
मेरी प्रिय इमरती,
जब से तुम मेरा पान
जैसा दिल लेकर पिहर गई हो तब से मेरी जिन्दगी बिन नमक की सब्जी जैसी बेस्वाद हो गई
है। अभी हमारे प्यार का अचार पूरी तरह से तैयार भी नहीं हो पाया था कि उसमें फफूंद
लग गई क्या तुम्हारा प्यार दूध का उफान था जो शीघ्र ही बैठ गया। मेरी आँखों में तो
अब तक तुम्हारी रोटी जैसा गोल चेहरा जो
बसा हुआ है। मैं अपनी शक्कर जैसी मीठी मुलाकातें भुल ही नहीं पाया।
प्यारी इमरती, तुम्हारे बिना जिन्दगी की रसोई अधूरी है। जब भी दो बर्तन
टकराते हैं, तुम्हारी याद ताजा हो जाती है। मैं तुम्हारी सेवईयाँ रूपी जुल्फों के
सपने देखने लगा हूँ। अब एहसास हुआ की तुम हलुए के जैसी नरम व मुलायम हो,तुम मेरे
बनाये स्वादिष्ट व्यंजन के बगैर नहीं रह सकती, इसलिए मेरे जीवन रूपी चाट में छौंक
लगाने लौट आओ, तुम्हें तुम्हारी फेवरेट मिठाई की कसम जल्दी आना इमरती।
तुम्हारा
लाल
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