वाह रे टमाटर 😊


मारा-मारा जो फिरा, गलियों ंमें बेहाल।
वही टमाटर हो गया, देखो माला माल।।

सड़कों पर फेंका गया, जैसे कोई अनाथ।
नहीं टमाटर आ रहा, आज किसी के हाथ।।

भाव टमाटर का हुआ, अब अस्सी के पार।
अच्छे-अच्छे देखकर, टपका रहे हैं लार।।

बिना टमाटर के नहीं, अच्छी लगे सलाद।
भोजन सब बेकार, बिना टमाटर स्वाद।।

बिना टमाटर के लगे, घर का फ्रिज बेकार।
जैसे साली के बिना,लगती है ससुराल।।

एक टमाटर सूँघकर, दिल भर लेते आज।
बिना टमाटर रो रही, फफक-फफक कर प्याज।।

जब सड़ते थे टमाटर, तब न समझा मोल।
आज टमाटर हो गया, सब किचिन से गोल।।

आंनदित हों आप सब, देख टमाटर लाल।
बिना टमाटर खाईये, अब अरहर की दाल।।

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