नमस्ते,
घुमड़-घुमड़ काले मेघा आये,
सबके मन हर्षाये,
रिमझिम-रिमझिम बारिश होगी
तपती गर्मी की छुट्टी अब होगी।
धरती का श्रृगांर होगा,
हरा-भरा संसार होगा।
चारों ओर हरियाली होगी,
पग-पग पर खुशहाली होगी।
मोर पपीहा गायेंगे,
दादुर शोर मचायेंगे।
चिड़िया भी चहचाहयेगी
हर मन को हर्षायेंगी।
आओ मिलजुल कर नाचें गायें
वर्षा का आन्नद उठायें
इंद्रदेव की महिमा न्यारी
वर्षा रानी, तुम सबको लगती प्यारी।
आज मैं, सरगम अपना ब्लॉग "रंगीली रंगोली" नाम से शुरू करने जा रही हूँ।
रंगोली के रंगो की तरह ही अलग-अलग रंगो से सजी रचनाएं मैं आप तक पहुँचा सकूँ, यही मेरा प्रयास रहेगा।आशा है कि आप सभी को मेरा ब्लॉग पसंद आयेगा व आप सभी समय-समय पर अपने विचारों से अवगत कराते रहेंगे।
ब्लॉग की शुरूआत 'बरखा रानी' को समर्पित एक अपनी कविता से करती हूँ-
घुमड़-घुमड़ काले मेघा आये,
सबके मन हर्षाये,
रिमझिम-रिमझिम बारिश होगी
तपती गर्मी की छुट्टी अब होगी।
धरती का श्रृगांर होगा,
हरा-भरा संसार होगा।
चारों ओर हरियाली होगी,
पग-पग पर खुशहाली होगी।
मोर पपीहा गायेंगे,
दादुर शोर मचायेंगे।
चिड़िया भी चहचाहयेगी
हर मन को हर्षायेंगी।
आओ मिलजुल कर नाचें गायें
वर्षा का आन्नद उठायें
इंद्रदेव की महिमा न्यारी
वर्षा रानी, तुम सबको लगती प्यारी।
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