क्यों है श्रावण भगवान शिव का प्रिय महीना?



कहा जाता हैं श्रावण भगवान शिव का अति प्रिय महीना होता है।इसके पीछे की मान्यता यह है कि दक्ष की पुत्री माता सती ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जिया। उसके बाद उन्होंने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पुरे श्रावण महीने में कठोर तप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की ।अपनी पत्नी से पुनः मिलन के कारण भगवान शिव को श्रावण का यह माह अत्यंत प्रिय है।यही कारण है कि इस माह में कुमारी कन्याएं अच्छे वर के लिए शिवजी से प्रार्थना करती हैँ।
   ऐसी मान्यता है कि श्रावण के महीने में भगवान शिव ने धरती पर आकर अपने ससुराल में विचरण किया था जहाँ अभिषेक कर उनका स्वागत हुआ था इसलिए इस माह में अभिषेक का महत्तव बताया गया है।
धार्मिक मान्यानुसार श्रावण माह में ही समुंद्र मंथन हुआ था जिसमे निकले हलाहल विष को  शिव ने ग्रहण किया जिस कारण उन्हें नील कंठ का नाम मिला और इस प्रकार उन्होंने से सृष्टि को  बचाया और सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था इसी कारण शिव अभिषेक में जल का विशेष  स्थान है।
   वर्षा ऋतु में भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और इस समय पूरी सृष्टि भगवान शिव के अधीन हो जाती है।अतः चौमास में भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु मानव अनेक धार्मिक कार्य दान,उपवास आदि करते हैं।



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