श्रावण या हरियाली तीज




श्रावण का महीना धार्मिक के साथ ही साथ प्रकृति की दृष्टि से भी बहुत महत्तवपूर्ण है। वर्षा की ठंडी फुहार से मौसम सुहाना हो जाता है एवं तपती गर्मी से छुटकारा मिलता है।चारों ओर हरियाली छा जाती है।श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे सिंधारा तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित लड़कियों के लिए मायके से उनकी ससुराल में फल,नमकीन, मिठाई विशेष रूप से घेवर,गुझिया आदि  और श्रृगांर का सामान भेजा जाता है। मायके से आने वाले  सामान का हर महिला इंतजार करती है क्योंकि विवाह के बाद लड़कियों का अपने मायके से प्रेम कम नहीं होता। नाना प्रकार की खाने की चीजों में उसे अलग स्वाद आता है, आये भी क्यों ना, आखिर उन सब में उन्हें अपनी माँ,भाभी का प्यार जो मिलता है। शायद इसीलिए इन त्योहारों में सामान भेजने की प्रथा बनायी गयी हैं ताकि बेटियाँ दूर रहते हुए भी मायके से जुड़ाव महसूस करें और छोटी-छोटी बातों में मायके के प्यार का अनुभव करें।

कल तीज का त्योहार मनाया जायेगा माना जाता है अनेक सालों की  कठोर तपस्या के बाद पार्वतीजी का महादेव से मिलन इसी दिन हुआ था।इस दिन महिलाएं  व्रत रखती हैं और सज संवर कर शिव-पार्वती की पूजा कर अपने   पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं।इस दिन झूला झूलते हैं, सावन के गाने गाये जाते हैं -


  • शिव शंकर चले कैलाश बूदियाँ पड़ने लगीं। गौराजी ने बोदई हरी-हरी मेंहदी शिवशंकर ने बोलई भंग बूदियाँ पड़ने लगीं। शिव शंकर चले कैलाश..... ।   
  • झूला पड़ा कदम्ब की डरिया, झूलें राधानन्द किशोर-2..सखिरी झूला पड़ा कदम्ब डरिया..चंदन काठ का बना हिंडोला रेशम की लागी डोर सखिरी झूला पड़ा कदम्ब....


मैंने भी कल की पूरी तैयारी कर ली है मेंहदी भी लगा ली है। हर साल की तरह इस बार भी बिल्डिंग की सभी महिलाएं शाम को मिलकर तीज मनायेंगी, झूला झूलना, नाच- गाना ,अनेक प्रतियोगिताएं,खाने -पीने के बीच कल का दिन कैसे निकल जायेगा पता ही नहीं चलेगा।
आपकी भी तैयारी हो गयी होगी , सही कहा ना ..कल खूब सजना मस्ती करना, चलिए फिर मिलते हैं।

सभी को हरियाली तीज की ढेर सारी शुभकामनाएं......................💕💕  

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