भारतीय मौसम में नौतपा का कारण और महत्व

 भारत में ग्रीष्म ऋतु के दौरान आने वाला नौतपाअत्यधिक गर्मी का वह काल होता है, जब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सबसे अधिक तीव्रता से पड़ती हैं। नौतपा का शाब्दिक अर्थ है "नौ दिनों की तपिश"। यह ज्येष्ठ मास (मई-जून) के दौरान आने वाले साल के सबसे गर्म दिन होते हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार सामान्यतः यह अवधि ज्येष्ठ मास में रोहिणी नक्षत्र के आरंभ के साथ मानी जाती है और लगभग नौ दिनों तक रहती है। आमतौर पर यह अवधि २५ मई से २ जून तक मानी जाती है। हिंदू ज्योतिष के अनुसार, सूर्य और रोहिणी नक्षत्र का यह मिलन अत्यधिक गर्मी का कारण बनता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इस समय सूर्य पृथ्वी के काफी निकट होता है, जिससे तापमान में भारी वृद्धि होती है। भारतीय जनजीवन, कृषि और मौसम विज्ञान में नौतपा का विशेष महत्व माना गया है। नौतपा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है -नौअर्थात नौ दिन और तपाअर्थात तपन या गर्मी। यह वह समय होता है जब सूर्य की गर्मी अपने चरम पर पहुँच जाती है। इस अवधि में तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और गर्म हवाएँ अर्थात लू चलती हैं। नौतपा का मुख्य कारण पृथ्वी की स्थिति और सूर्य की सीधी किरणें हैं। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य कर्क रेखा की ओर बढ़ता है। इस समय भारत के अधिकांश भागों पर सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। साथ ही, मई और जून में दिन लंबे होते हैं। लंबे समय तक सूर्य का प्रकाश मिलने के कारण भी धरती अधिक गर्म हो जाती है। इसके अलावा, इस समय वायुमंडल में नमी कम होती है। गर्म और शुष्क हवाएँ चलती हैं जिन्हें लूकहा जाता है। ये भी गर्मी को और अधिक बढ़ा देती हैं।

 

नौतपा का महत्व

कहा जाता है कि यदि नौतपा अच्छी तरह तपे, तो वर्षा भी अच्छी होती है। तीव्र गर्मी के कारण वातावरण में आवश्यक परिवर्तन होते हैं जो मानसून के आगमन में सहायक बनते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार नौतपा की तीव्र गर्मी समुद्र और धरती के तापमान में अंतर उत्पन्न करती है, जिससे निम्न दाब क्षेत्र बनते हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर मानसून को भारत की ओर आकर्षित करती है। किसानों के अनुसार नौतपा की गर्मी मिट्टी और वातावरण में उपस्थित अनेक हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती है। इससे आगामी फसलों को लाभ मिलता है। नौतपा लोगों को शरीर की सुरक्षा और जल संरक्षण का महत्व भी सिखाता है। इस समय अधिक पानी पीना, हल्का भोजन करना और धूप से बचना आवश्यक माना जाता है। नौतपा को भारतीय लोकजीवन में प्रकृति के संतुलन से जोड़ा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि नौतपा जितना अधिक तपेगा, वर्षा उतनी ही अच्छी होगी।

नौतपा के दौरान बरती जाने वाली मुख्य सावधानियाँ

  • अधिक से अधिक पानी पिएँ।
  • दोपहर की धूप में बाहर निकलने से बचें।
  • सिर को कपड़े या टोपी से ढकें।
  • हल्का और पौष्टिक भोजन करें।
  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

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