मनभावन-सी सर्दी आई....!!!

गुनगुनी धूप में

धुआँ-धुआँ-सी

घूम रही है

मुखरित-सी पुरवाई ... नववर्ष के द्वारे देखो

मनभावन-सी सर्दी आई...!!!



अलाव की लहरों पर

पिघलती कोहरे की परछाई

तितली-तितली मौसम पर

गीत सुनाती

शरद ऋतु की शहनाई

नववर्ष के द्वारे देखो

मनभावन-सी सर्दी आई

प्रकृति की नीरवता में

आसमान है जमा-जमा-सा

पुष्पित वृक्षों पर सोया है

सुबह का कोहरा घना-घना-सा

उनींदे सूर्य से गिरती ओस की

बूँदों से लिपटा

सुरमई-सा थमा-थमा-सा

जाग उठा मुक्त भाव से

मौसम ने कसमसा कर

अमराई में ली अंगडाई

नववर्ष के द्वारे देखो

मनभावन-सी सर्दी आई ।

टिप्पणियाँ

आपके लिए और लेख

हिंदी साहित्य का बदलता स्वरुप

बहनें मायके से कुछ लेने नही बल्कि बहुत कुछ देने आती हैं!

वन विनाश....सोचो मानव.....

रंगोली