दोस्तों के साथ जियोगे खुद को जवां पाओगे!

सुबह सुबह किसी ने द्वार खटखटाया,

मैं लपककर आयीजैसे ही दरवाजा खोला

तो सामने "बुढ़ापा" खड़ा था,

भीतर आने के लिए, जिद पर अड़ा था..😔

 

मैंने कहा, " नहीं भाई ! अभी नहीं...

 ...अभी तो मेरी 'उमर' ही क्या है..''

 वह  हँसा और बोला, " बेकार कि कोशिश ना कर, मोहतरमा,

 मुझे रोकना नामुमकिन है...!"

 

मैंने कहा, ".. अभी तो कुछ दिन रहने दे,

अभी तक दूसरो के लिए जी रही हूँ ..

अब अकल आई है तो कुछ दिन

अपने लिए और सहेलियों  💃💃

के साथ भी जीने दे..''



बुढ़ापा हंस कर बोला, " अगर ऐसी बात है तो चिंता मत कर..

उम्र भले ही तेरी बढ़ेगी, मगर बुढ़ापा नहीं आएगा,

तू जब तक सहेलियों 💃💃 के साथ जीएगी

खुद को जवान ही पाएगी!"


  

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